नारी नेतृत्व की नई पहचान : अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा की महाराष्ट्र महिला प्रदेशाध्यक्ष बनीं सौ. रेखाताई पिंप्राळे

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✍️ — एडवोकेट क्रांति महाजन

मो. +91 86004 98778

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अमरावती निवासी कलाल समाज की सौ. रेखाताई पिंप्राळे एक असाधारण व्यक्तित्व की धनी महिला हैं । समाज , राष्ट्र और मानवकल्याण के लिए निःस्वार्थ भाव से निरंतर कार्य करने वाली यह महिला आज अपने कर्तृत्व के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर गौरव का विषय बनी हैं । अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा जैसी अत्यंत प्रतिष्ठित और सर्वोच्च समर्पण वाली अखिल भारतीय सर्ववर्गीय कलाल समाज संगठन के महाराष्ट्र राज्य महिला प्रदेशाध्यक्ष पद पर उनका चयन होना , उनके कर्मठ , संघर्षशील और प्रभावशाली व्यक्तित्व की सशक्त प्रमाणिकता है । उनके इसी समर्पित व्यक्तित्व के सम्मानस्वरूप यह लेख समर्पित है ।

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✍️ सौ. रेखाताई पिंप्राळे इन्होने आज तक समाज के असंख्य प्रतिभावान व्यक्तियों को एक मंच पर लाकर सामाजिक जीवन में एकता , सम्मान और प्रेरणा का अद्भुत संगम साकार किया है । उनके कारण समाज के प्रत्येक कार्यक्रम में एक विशेष ऊर्जा , अलग उत्साह और असामान्य प्रतिबद्धता देखने को मिली है । यह प्रेरणा कहाँ से आती है—इसका उत्तर एक ही नाम में निहित है : सौ. रेखाताई गजाननराव पिंप्राळे ।

समाज के लिए जिस निष्ठा और निःस्वार्थ भाव से उन्होंने कार्य किया है , वह सदैव आदर उत्पन्न करता है । वास्तव में , वे हर सामाजिक कार्यक्रम की आत्मा और उसके पीछे की प्रेरक शक्ति होती हैं ।

रेखाताई के कार्य का अवलोकन करने पर यह स्पष्ट होता है कि उनका सामाजिक कार्य किसी प्रसिद्धि की लालसा से प्रेरित नहीं है , बल्कि समाज-प्रेम और जनकल्याण की गहन तड़प से उपजा हुआ है । उनकी कार्यशैली अत्यंत शांत , संयमित और सुव्यवस्थित है । वे कभी स्वयं को आगे रखकर अपनी उपलब्धियों का बखान नहीं करतीं , किंतु उनकी प्रत्येक क्रिया में उनके विचार , त्याग और समर्पण की स्पष्ट छाप दिखाई देती है ।

रेखाताई केवल एक नाम नहीं हैं— वे एक प्रेरणा हैं , एक दृष्टि हैं और एक मूल्य हैं । समाज के हर घटक को साथ जोड़कर रखने की उनकी क्षमता , संगठन कौशल की एक जीवंत पाठशाला प्रतीत होती है । उनका समर्पण स्वयं का त्याग कर समाज के लिए जीने का उदाहरण है । अमरावती शहर में उनका निवास समाज के लिए मानो “अपना घर” बन चुका है । समाज का कोई भी व्यक्ति बीमार हो , संकट में हो या मार्गदर्शन का इच्छुक हो— रेखाताई सबसे पहले सहायता के लिए आगे आती हैं । उनके घर के द्वार समाज के लिए सदैव खुले रहते हैं ।

आज के समय में , जब अनेक लोग सामाजिक कार्य को व्यक्तिगत प्रसिद्धि का साधन बना लेते हैं , तब रेखाताई का निःस्वार्थ समर्पण एक दुर्लभ उदाहरण बनकर सामने आता है । वे अपने स्वास्थ्य की भी परवाह किए बिना दिन-रात समाजकार्य में जुटी रहती हैं । यह केवल उनका कर्तृत्व नहीं , बल्कि मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का परिचायक है ।

रेखाताई का नेतृत्व किसी राजनीतिक पद पर आधारित नहीं है ; यह विश्वास पर आधारित नेतृत्व है , जो लोगों के हृदय से उत्पन्न होता है । *अखिल भारतीय हैहय कलचुरी महासभा* जैसी राष्ट्रीय संस्था के महिला प्रदेशाध्यक्ष पद पर उनका चयन न केवल समाज के लिए , बल्कि प्रत्येक स्त्री के लिए प्रेरणादायी है । उन्होंने यह सिद्ध कर दिया है कि संगठनात्मक नेतृत्व क्षमता , कार्य और ईमानदारी पर निर्भर करता है ।

दुर्भाग्यवश , “जहाँ उपज होती है वहाँ उसका मूल्य नहीं होता” यह कहावत यहाँ भी लागू होती है । इतनी बड़ी जिम्मेदारी निभाने के बावजूद , समाज द्वारा उन्हें अपेक्षित सम्मान अब तक नहीं मिल पाया है — यह खेदजनक है । किंतु इतिहास साक्षी है कि अंततः सत्य और कर्तृत्व को उसका उचित स्थान अवश्य मिलता है ।

रेखाताई का जीवन-प्रवास संघर्ष से कर्तृत्व तक और कर्तृत्व से समर्पण तक की यात्रा है । प्रतिकूल परिस्थितियों में उन्होंने अपने परिवार को संबल दिया , बच्चों की शिक्षा से लेकर समाज के प्रत्येक सदस्य के सुख-दुःख में सहभागी बनी रहीं । उन्हें केवल समाजकार्य की सीमाओं में बाँधना अन्याय होगा , क्योंकि वे समाज की उन्नति के लिए प्रज्वलित एक ज्योति हैं । उनके कार्य समाज को दिशा देते हैं , प्रेरणा देते हैं और आशा का प्रकाश फैलाते हैं ।

वस्तुत: समाज के वार्षिक कार्यक्रमों की सूक्ष्म योजना — आर्थिक व्यवस्थाएँ , सदस्यों का समन्वय , स्थान और अतिथियों की व्यवस्था , विभिन्न घटकों से संवाद — ये सभी कार्य वे अत्यंत दक्षता से करती आई हैं । इसी कारण अमरावती जिला कलाल समाज एकजुट हो सका है ।

अनेक बार आर्थिक सहयोग समय पर न मिलने पर भी रेखाताई स्वयं आगे बढ़कर लोगों को प्रेरित करती हैं और हर कार्यक्रम को सफल बनाती हैं । उनका दृढ़ विश्वास है —

“यदि उद्देश्य शुद्ध हो , तो ईश्वर स्वयं मार्ग दिखाता है ।”

और वास्तव में ऐसा ही होता है ।

आज अमरावती जिले में अनेक लोग केवल रेखाताई को देखकर समाज संगठन से जुड़े हैं , क्योंकि वे केवल संस्था का नाम नहीं बढ़ातीं , बल्कि लोगों के मन में विश्वास जगाती हैं ।

आज समाज में एक गंभीर प्रश्न उभर रहा है — कुछ सक्षम लोग सहायता तो करते हैं , पर अपेक्षाओं के साथ। “हमने दिया है , तो कुछ वापस मिलना चाहिए” — यह मानसिकता बढ़ती जा रही है । रेखाताई इस प्रवाह के विपरीत चलती हैं । वे देती हैं , पर किसी प्रतिफल की अपेक्षा नहीं रखतीं । उनके लिए समाज को देना ही धर्म है ।

उनका जीवन इस वाक्य का सजीव उदाहरण है —

“कर्तव्य निभाते समय प्रसिद्धि की इच्छा मत रखो ; सेवा करते समय प्रतिफल की आशा मत पालो ।”

मनुष्य की वास्तविक ऊँचाई उसके पद में नहीं , बल्कि उसके कर्मों में होती है । रेखाताई के कर्मों में सौजन्य , संयम , विवेक , करुणा और अद्भुत कार्यक्षमता स्पष्ट झलकती है । उनका प्रत्येक दिन समाज के लिए कुछ नया करने के संकल्प के साथ आरंभ और समाप्त होता है । उन्हें देखकर प्रतीत होता है कि नारी-शक्ति केवल भावनाओं का सागर नहीं , बल्कि दृढ़ निश्चय से शिखर छूने वाली पर्वतमाला है ।

प्रतिभाओं को प्रोत्साहन देना , नई पीढ़ी को प्रेरित करना और समाज के हर घटक को अपनापन देना — इन सभी क्षेत्रों में रेखाताई अग्रणी हैं । उनके शब्दों में अपनापन , उनकी उपस्थिति में शांति और उनके विचारों में तेज है ।

रेखाताई का योगदान केवल एक समाज तक सीमित नहीं है ; वे भारतीय नारी की संघर्षशीलता और सामर्थ्य का प्रतीक हैं । वे सिद्ध करती हैं कि जिनका हृदय विशाल होता है , उनके लिए कोई सीमा नहीं होती ।

रेखाताई पिंप्राळे का शब्दगौरव करना केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं , बल्कि उन सभी अदृश्य शक्तियों का सम्मान है , जो पर्दे के पीछे रहकर समाज की नींव मजबूत करती हैं ।

रेखाताई उसी शक्ति का जीवंत रूप हैं —

कर्तृत्व के प्रकाश से आलोकित ,

संघर्ष की अग्नि में तपकर निखरी ,

और समर्पण की सुगंध से समाज को सुवासित करने वाली

एक सच्ची समाजमाता ।

समाज का दायित्व है कि वह ऐसी विभूतियों की पहचान करे और उन्हें सम्मान दे , क्योंकि समाज की वास्तविक समृद्धि धन में नहीं , बल्कि ऐसे व्यक्तित्वों के अस्तित्व में होती है , जो समाज को दिशा और आत्मा प्रदान करते हैं ।

अंत में बस इतना ही कहना चाहूँगा —

“रेखाताई केवल एक व्यक्तित्व नहीं हैं , वे एक प्रेरणा हैं। वे कलाल समाज का आत्मविश्वास हैं।”

वे यह सिखाती हैं कि संघर्ष में भी सौंदर्य है ,

समर्पण में ही सच्चा संतोष है

और समाजसेवा में ही वास्तविक प्रतिष्ठा निहित है ।

veer nayak

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