आर्वी. 27.11.025
वर्ष 2016 याने पुरे नऊ वर्षां बाद पुरे राज्य मे मनपा और नगर निगमो के चुनाव संपन्न होने जा रहे है!
नऊ वर्षां बाद राज्य जनता अपने पसंदीदा पार्षदो का चुनाव करेंगी जिसका जनता बेसबरी से इंतजार कर रही थी लेकिन अभी यह सुनिचित नही है की आगामी दो दिसम्बर को मतदान होगा और तीन दिसम्बर को नातीजे आयेंगे हि क्योकी मुंबई उच्च न्यायलाय राज्य सरकार को 50 प्रतीक्षत से अधिक आरक्षण ना देने की बात को लेकर पहले ही सक्त हिदायत दे चुका है और आगामी 29नवबर को मुंबई उच्च न्यायलाय इस पर सुनवाई करेगा /अपनी हिदायत मे न्यायलाय ने सरकार को गंभीर चेतावनी देते हुए कहा था की 50प्रतिशत से अधिक आरक्षण दिया गया तो संपूर्ण चुनाव प्रक्रिया रोक दी जयंगी! न्यायलय के निर्णय पर राज्य सरकार. चुनाव आयोग से लेकर सभी की निगाहे टिकी हुई है!
आर्वी शहर मे नामांकन पश्च्यात अब चुनाव प्रचार ने काफी जोर पकड लिया है!
सभी राजनीतीक दल प्रचार मे जूट गये है! कांग्रेस. भाजपा. राकपा. (शरद पवार गुट )शिवसेना शिंदे गुट. ब स पा. निर्दलीय समेत कुल 78 प्रत्याशीअपने भाग्य की आजमाईश कर रहे है जिसमे नागराअध्यक्ष पद के 6प्रत्यशी भी मुख्य रूप से शामिल है नागराध्यक्ष पद के लिये काँग्रेस तथा राकपा की और से अंजली स्वप्नील उर्फ बाडा जगताप. भा ज पा से स्वाती प्रकाश गुल्हाने. शिव सेना शिंदे गुट से दीपाली निलेश देशमुख. रॉकपा अजित गुट से शुभांगी श्रीकांत कलोडे.ब स पा से भावना रवींद्र दारून्डे और मो. अमरीन दिन निर्दलीय प्रत्यशी के रूप मे अपने भाग्य की आजमाईश कर रही है!
किस का भाग्य चमकेगा यह आगामी 3 दिसम्बर को ही पता चल सकेंगा फिलाल इन के साथ कुल 72 प्रत्यशी पार्षद बनने पर जोर आजमाईश करते नजर आ रहे है!
वर्ष 2016 मे भा ज पा के पूर्व विधायक दादाराव केचे चुनाव मे पार्टी के लिये अगुवाई कर रहे थे जिस मे उन्हे 100प्रतिशत सफलता हासील हुई थी और नागराध्यक्ष कुल 23पार्षद भा ज पा के निरवाचित हुए थे/इस की प्रमुख वजह थी चुनाव से एक दिन पूर्व शहर मे हुई राज्य के तात्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडवनीस की जन सभा थी जिसमे उनोहने जनता से वादा किया था की केचे के पास राज्य सरकार की तिजोरी की एक चाभी देंगे और शहर का सामग्र विकास किया जाएंगा जिससे पूरजोर अस्वस्थ होकर शहर की जनता ने भाजपा के हित मे एक तरफाअपना फैसला सुनाया था
लेकिन अब के ऐसा नही होगा/कयास लगाये जा रहे है की कहा से कोन निवचित होगा कुश कहा नही जा सकता.
इस चुनाव मे भाजपा की अगुवाई वर्तमान विधायक सुमित वानखडे कर रहे है, वे मुख्यमंत्री के माने जाते है. इसलिये शहर मे चर्चा का बाजार गर्म है की इस बार फडणवीस की सभा शहर मे हो सकती है. और फिर से इस बार कही मुख्यमंत्री राज्य सरकार की तिजोरी ही आर्वी मे रख देने का वादा कर शहरवासियी के साथ ठगी कर सकते है.
लेकिन अब की बार जनता विस्वास नही करनेवली और सावध होकर मतदानकरेंगी चुनाव भले ही निगम का हो लेकिन मुख्य मुकाबला वर्तमान सांसद अमर काले और विधायक वानखेडे के बीच ही माना जा रहा है. इस लिये किस की होगी जीत और किसकी होगी हार और कोन होगा असली बाजीगर यह 3 दिसम्बर को ही पता चल सकेंगा…
















